उम्मीद है कि वेस्टइंडीज टीम को उसके हिस्से का सम्मान मिलेगा

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70-80 के दशक में वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम का जो बोलबाला था वो शायद ही कभी किसी क्रिकेट टीम का इतने लंबे समय तक रह पाए। पिछले कुछ सालों में वेस्ट इंडीज़ टीम की ज्यादा गिनती भी नहीं हो रही थी और ऐसे में आई है इस वर्ल्ड कप टीम की बड़ी जीत।

जीत के पीछे की कहानी भी बेहद दर्दनाक लेकिन दिलचस्प है, टीमों को जीतने के लिए उनके बोर्ड का साथ होना बहुत ज़रूरी है, लेकिन आप ये जानकर हैरान रह जाएंगे कि क्रिकेट जिसकी लोकप्रियता को पैसे से तोला जाता है, उसमें ये टीम अपने पैसे से टिकट खरीद कर आई, वेस्ट इंडीज टीम को बोर्ड की तरफ से कोई सहायता नहीं मिली।

यहां तक कि अपने को मोटिवेट करने के लिए भी खुद टीम ने अपना एक गाना बनाया, एक डांस तैयार किया और जैसा कि उस गाने का नाम है… वी द चैंपियन, अंत में वेस्ट इंडीज ने खुद को चैंपियन साबित किया। वो भी एक ऐसे ओवर से जिसमें किसी ने उम्मीद नहीं की होगी कि उसमें चार छक्के लग जाएंगे।

क्लाइव लॉयड की वेस्ट इंडियन टीम के महान बनने के पीछे एक बहुत बड़ा कारण था उस समय की रंगभेद नीति, जिसने इन खिलाड़ियों को क्रिकेट के मैदान पर अपना वर्चस्व साबित करने के लिए प्रेरित किया और तब भी शुरुआत में वेस्ट इंडीज का क्रिकेट बोर्ड पूरी तरह से उनके साथ नहीं था, लेकिन जीत के बाद वेस्ट इंडीज क्रिकेट बोर्ड का रवैया लगातार बदलता गया। मैं उम्मीद करुंगा कि ब्रावो के गाने से लेकर सैमी के डांस तक अब बोर्ड इसे देखकर, इसी टीम की तरफ अपना रवैया बदलेगा और इस टीम को जिसे वो वर्ल्ड कप में भेजने को तैयार नहीं था उसे उसके हिस्से का हक़ और सम्मान देगा।