लाज़िमी है कि विराट को सचिन की राह पर कहा जाता है

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मैंने टी-20 का क्रिकेट उसकी बड़ी लोकप्रियता के बावजूद ना के बराबर देखा है, वजह उस युग के क्रिकेट की छाप मेरे दिमाग पर रही है जिसमें क्रिकेट जेंटलमेन अंदाज़ में खेला जाता था।

विराट की ऑस्‍ट्रेलिया के खिलाफ पारी क्रिकेट की किसी भी किताब में लिखे गए किसी भी शॉट से एक परसेंट भी अलग नहीं थी। यानी विराट ने ये साबित किया कि टी-20 क्रिकेट में दबाव के बावजूद बल्ले को टेढ़ा मेढ़ा कर खेलने की ज़रूरत नहीं है। क्रिकेट जितना सही हो उतना ही विराट को भी सही नज़र आता है।

आखिर के ओवरों में विराट कोहली के कवर ड्राइव ने मुझे सचिन तेंदुलकर की याद दिला दी। पलट कर देखूं तो याद आता है कि लाहौर में पाकिस्तान के खिलाफ़ एक मैच में सचिन ने ऐसे ही एक शॉट खेला था और लाहौर के उस गद्दाफ़ी स्टेडियम में मौजूद होने के बावजूद मुझे अभीतक नहीं याद कि सचिन के शॉट खेलने के बाद क्या किसी को गेंद नज़र आई?

विराट के शॉट्स ठीक उसी स्तर के थे और इसलिए लाज़िमी है उन्हें सचिन की राह पर कहा जा रहा है। विराट कोहली ने अपनी निजी जिंदगी पर कमेंट को लेकर नाराज़गी जतायी है जो मेरे हिसाब से बिल्‍कुल सही है। विराट कोहली एक बेहतरीन क्रिकेटर हैं और देश को उन्हें उसी नज़रिए से देखना चाहिए, मैदान से बाहर उनकी जिंदगी का किसी को हिसाब किताब रखने की जरूरत नहीं है।