हर रोज़ होना चाहिए महिलाओं का सम्‍मान…

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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिलाओं का सम्मान बहुत अच्छी बात है, बल्कि उनका सम्मान तो हर रोज़ होना चाहिए। घर से लेकर बाहर तक जिस बखूबी से वो ज़िम्मेदारी निभाती हैं, उसकी तारीफ़ के लिए शब्द कम पड़ जाएंगे। हालांकि आज भी महिलाओं को कई जगह अपने अधिकार की लड़ाई जारी रखनी पड़ रही है।

संसद में ही ज़्यादातर दलों में एक राय होने के बावजूद अभी तक महिला आरक्षण बिल पास नहीं हुआ है। आज भी देशभर में बड़े-बड़े पोस्टर लगाकर लोगों को बताना पड़ता है कि बेटी है तो कल है… यानी मानसिकता में अभी भी बहुत हद तक बदलाव नहीं आया है। अभी भी कुछ बड़े मंदिरों और दरगाहों में जाने के लिए महिलाओं को क़ानूनी लड़ाई लड़नी पड़ती है… पुलिस से भिड़ना पड़ता है। ये उस देश में है, जहां देवी की पूजा होती है।

इस देश में आज भी कोख में बच्चियों को मार दिए जाने की ख़बरें आती हैं। कम उम्र में लड़कियों की शादी की ख़बरें आती हैं। वहीं, महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध पर रोक अब भी बहुत बड़ी चुनौती है। हालाकि एंटी रेप लॉ में बदलाव कर क़ानून को सख़्त बनाया गया है, लेकिन फिर मैं कहता हूं कि मानसिकता में बदलाव ज़रूरी है। तो क्या बदलाव नहीं आया है..बिल्कुल आया है..सोच भी बदली है और आज तरक्की में महिलाओं की हिस्सेदारी पुरुषों से ज़्यादा दिखती हैं। वो विमान उड़ाकर सात संमदर पार भी जा रही हैं, तो सेना में भी अपना दमखम दिखा रही हैं। कई ज़िलों की कप्तान महिलाएं तो कई ज़िलों की कलेक्टर भी… मुख्यमंत्री भी हैं और सरकार के फ़ैसलों में अहम दखल भी रखती हैं। तो फिर आज ही क्यों.. हर रोज़ महिलाओं को सम्मान मिले… जो मां भी हैं, बेटियां भी हैं, बहू भी हैं और पत्नी भी हैं।